श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भगवान के 24 अवतारों का वर्णन सुन भावुक हुए श्रद्धालु

श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भगवान के 24 अवतारों का वर्णन सुन भावुक हुए श्रद्धालु

श्रीमद् भागवत कथा के दूसरे दिन भगवान के 24 अवतारों का वर्णन सुन भावुक हुए श्रद्धालु

हरिद्वार: दिनांक 2 अगस्त श्री मद् सेवा सत्कर्म परिवार के तत्वाधान में अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के पावन अवसर पर गंगा मैया के तट पर श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन परम पूज्य भगवताचार्य सुरेशचंद्र जी पंड्या के द्वारा शुकदेव जन्म, परीक्षित श्राप और अमर कथा का वर्णन करते हुए बताया।

कथा व्यास जी ने उन्होंने कहा कि भागवत के चार अक्षर इसका तात्पर्य यह है कि भा से भक्ति, ग से ज्ञान, व से वैराग्य और त त्याग जो हमारे जीवन में प्रदान करे उसे हम भागवत कहते है। इसके साथ साथ भागवत के छह प्रश्न, निष्काम भक्ति, 24 अवतार श्री नारद जी का पूर्व जन्म, परीक्षित जन्म, कुन्ती देवी के सुख के अवसर में भी विपत्ति की याचना करती है। क्यों कि दुख में ही तो गोविन्द का दर्शन होता है। जीवन की अन्तिम बेला में दादा भीष्म गोपाल का दर्शन करते हुये अद्भुत देह त्याग का वर्णन किया। साथ साथ परीक्षित को श्राप कैसे लगा तथा भगवान श्री शुकदेव उन्हे मुक्ति प्रदान करने के लिये कैसे प्रगट हुये इत्यादि कथाओं का भावपूर्ण वर्णन किया।

साथ ही श्रीमद् भागवत तो दिव्य कल्पतरु है यह अर्थ, धर्म, काम के साथ साथ भक्ति और मुक्ति प्रदान करके जीव को परम पद प्राप्त कराता है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत केवल पुस्तक नही साक्षात श्रीकृष्ण स्वरुप है। इसके एक एक अक्षर में श्रीकृष्ण समाये हुये है। उन्होंने कहा कि कथा सुनना समस्त दान, व्रत, तीर्थ, पुण्यादि कर्मो से बढ़कर है। कथा सुनकर पांडाल में उपस्थित श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।

दूसरे दिन के मुख्य यजमानश्री- स्व.नाथीबेन रणछोड़दास स्वामी,स्व.रणछोड़दास भवानभाई स्वामी (पाटण) की स्मृति में श्री मफतलाल रणछोड़दास प्रजापति, श्री मति हसुमतीबेन भाईजीभाई प्रजापति, पिनाकिनभाई, शैलेशभाई, पल्लवीबेन एवं समस्त परिवार (डीसा), गुजरात।

इस कथा का लाइव प्रसारण A-one imagine TV चैनल द्वारा भारत सहित 126 देशी में किया जा रहा है। साथ ही सोशल मीडिया यूट्यूब, फेसबुक के द्वारा भी प्रसारण हो रहा है।

 

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