श्रीमद्भागवत कथा चतुर्थ दिवस में धूमधाम से मनाया श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव

श्रीमद्भागवत कथा चतुर्थ दिवस में धूमधाम से मनाया श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव

हरिद्वार: दिनांक 4 अगस्त श्री मद् सेवा सत्कर्म परिवार के तत्वाधान में अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के पावन अवसर पर गंगा मैया के तट भारत माता मंदिर, समन्वय सेवा ट्रस्ट हरिद्वार में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर परम पूज्य भगवताचार्य सुरेशचंद्र जी पंड्या के द्वारा, प्रभु के वामन अवतार के वृतांत का विस्तार पूर्वक वर्णन, जड़भरत, अजामिल का व्याख्यान, प्रभु श्रीराम के चरित्र का वर्णन और कृष्ण जन्म की कथा सुनाई।

कथा व्यास जी ने प्रभु भक्ति की महिमा बताते हुए कहा भगवान विष्णु राजा बलि को वामन अवतार में छलने आते हैं। वे राजा बलि से तीन पग जितनी भूमि मांग लेते हैं। राजा बलि के गुरू उनका साक्षात्कार ईश्वर से कराते हुए उन्हें संकल्प लेने से रोकते हैं। राजा बलि के आग्रह पर जब भगवान विष्णु वामन अवतार से अपने विराट स्वरूप में आकर दो ही पैर में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड को माप लेते हैं।

राजा की परीक्षा लेते हुए पूछते हैं कि तीसरा पैर कहां रखूं अन्यथा नरक भेज दूं। राजा बलि ने अपने संकल्प की रक्षा करते हुए प्रभु भक्ति में भगवान से अपना तीसरा पैर उन पर रख उन्हें भक्त रूप में स्वीकार करने को कहा। राजा बलि के भक्त प्रेम के आगे स्वयं भगवान हार गए और राजा बलि के महल का द्वारपाल बन उन्हें स्वीकारा।

भागवत कथा के आगे के प्रसंग में व्यास भगवताचार्य सुरेशचंद्र जी पंड्या ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाई। कथा सुनकर श्रद्धालु भाव विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि जिस समय भगवान कृष्ण का जन्म हुआ जेल के ताले टूट गए, पहरेदार सो गए। वासुदेव देवकी बंधनमुक्त हो गए। प्रभु की कृपा से कुछ भी असंभव नहीं है। कृपा न होने पर प्रभु मनुष्य को सभी सुखों से वंचित कर देते है। चौथे दिन मंगलवार को श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया। पंडाल में जय कन्हैयालाल के जयकारे गूंज उठे। भक्तों ने बाल कृष्ण को दुलार किया। भगवान को माखन-मिश्री का भोग लगाकर आरती की गई। कथा वाचक ने श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर उनके जन्म का उद्देश्य भी बताया। भगवान का जन्म होने के बाद वासुदेव ने भरी यमुना पार करके इन्हें गोकुल पहुंचा दिया, वहां यशोदा के यह पैदा हुईं, शक्तिरूपा बेटी को लेकर चले आए, श्री कृष्ण जन्मोत्सव पर नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की गीत पर एवं संगीतकारों द्बारा सुंदर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में माताएं, बहनें व भक्तगण उपस्थित थे।

चतुर्थ दिवस के मुख्य यजमानश्री-  स्व.नाथीबेन रणछोड़दास स्वामी,स्व.रणछोड़दास भवानभाई स्वामी (पाटण) की स्मृति में श्री मफतलाल रणछोड़दास प्रजापति, श्री मति हसुमतीबेन भाईजीभाई प्रजापति, पिनाकिनभाई, शैलेशभाई, पल्लवीबेन एवं समस्त परिवार (डीसा), गुजरात। इस कथा का लाइव प्रसारण A-one imagine TV चैनल द्वारा भारत सहित 126 देशी में किया जा रहा है। साथ ही सोशल मीडिया यूट्यूब, फेसबुक के द्वारा भी प्रसारण हो रहा है।

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