कोटा: चतुर्थ दिवस मनुष्य यदि सुनीति के अधीन होता है तो सदाचारी बनता है, ध्रुव अविनाशी ब्रह्मानंद का स्वरुप है।

कोटा: चतुर्थ दिवस मनुष्य यदि सुनीति के अधीन होता है तो सदाचारी बनता है, ध्रुव अविनाशी ब्रह्मानंद का स्वरुप है।

कोटा: दिनांक 12 अगस्त श्री बेटन सिंह चौहान एवं श्रीमती कुषमा देवी चौहान परिवार द्वारा आयोजित अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) के पावन अवसर पर जय अम्बे नगर, रंगबाड़ी, पुलिस चौकी के पास, कोटा (राजस्थान) में श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर परम पूज्य डॉ. कार्ष्णि पं. भरत जी महाराज ने बतलाया कि मनुष्य यदि सुनीति के अधीन होता है तो सदाचारी बनता है, ध्रुव अविनाशी ब्रह्मानंद का स्वरुप है।

चौहान परिवार द्वारा आयोजित जय अम्बे नगर, रंगबाड़ी, कोटा में श्रीमद् भागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा सुनाते हुए कथा वाचक डॉ. कार्ष्णि पं. भरत जी महाराज ने बताया कि राजा उत्तानपाद की सुनीति और सुरुचि नाम की दो पत्नियां थी ध्रुव सुनीति का पुत्र था।

आध्यात्मिक दृष्टि से विचार करें तब हम जान सकेंगे कि जीव मात्र की दो पत्नियां हैं सुरुचि का अर्थ है वासना सुनीति का अर्थ सदाचारी संयम व विरक्त पुरुष आज का मनुष्य वासना के अधीन होकर विलासी जीवन जीना चाहता है, ईश्वर का ज्ञान विलासी मनुष्य को नहीं हो सकता, यह कहा जाए कि नीति के अनुसार जो पवित्र जीवन जीता है उसी को ईश्वर का ज्ञान मिलता है।

ध्रुव का तात्पर्य है अविनाशी मनुष्य यदि सुनीति के अधीन होता है तो सदाचारी बनता है ध्रुव अविनाशी ब्रह्मानंद का स्वरुप है। राजा उत्पाटन पाद सुरुचि के अधीन था उसने सोचा कि यदि ध्रुव को गोद में दूंगा तो सुरुचि नाराज हो जाएगी वह था तो राजा किंतु सुरुचि रानी का ही दास था माता सुनीति ने अपने बालक ध्रुव को अच्छे संस्कार अच्छी शिक्षा देकर उसे नारायण से मिला दिया।

मां सुनीति अपने पुत्र ध्रुव से कहती हैं तुम वन में जाकर भगवान की आराधना करो, भगवान नारायण तुम्हारे साथ हैं वे तुम्हारी रक्षा करेंगे। देवर्षि नारद रास्ते में मिले तो बालक ध्रुव की तीव्र जिज्ञासा देखकर उन्होंने भगवान के दर्शन करने के लिए ओम नमो भगवते वासुदेवाय का मंत्र दिया। 6 माह की अवधि बीत जाने पर ध्रुव समक्ष भगवान नारायण प्रकट हो गए। भगवान के दर्शन होने के बाद भी सच्चे ज्ञानी भक्त भगवान की भक्ति नहीं छोड़ते उनका भजन नहीं छोड़ते कृष्ण कृपा साध्य उनका आश्रय होने पर ही व्यक्ति निर्भय बनता है।

ध्रुव की भक्ति से प्रसन्न नारायण ने दर्शन दिए
ध्रुव ने भगवान की शरणागति स्वीकार की तो भगवान ने उनको अपने दर्शन दिए राज्य दिया और अंत में बैकुंठ वास भी दिया। वृंदावन प्रेम की भूमि है वहां रहकर भजन करने से मन जल्दी शुद्ध होता है। जीव और ईश्वर का मिलन शीघ्र होता है। आयोजक परिवार सहित कई श्रद्धालु उपस्थित थे।

आयोजक : श्री बेटन सिंह चौहान एवं श्रीमती कुषमा देवी चौहान पुत्र: उम्मेद सिंह- सुधा देवी पौत्र हर्षित चौहान, उदल सिंह – अर्चना चौहान पुत्र अभय प्रताप सिंह चौहान, पुत्री: आयुषि चौहान ने कथा का श्रवण लाभ उठाया।

इस कथा का लाइव प्रसारण A-one imagine TV चैनल द्वारा भारत सहित 126 देशों में किया जा रहा है। साथ ही सोशल मीडिया यूट्यूब, फेसबुक के द्वारा भी प्रसारण हो रहा है।

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