हरिद्वार: भागवत कथा में भक्त प्रह्लाद का प्रसंग सुन भाव विभोर हुए श्रद्धालु
हरिद्वार : दिनांक 07 अगस्त श्री मद् सेवा सत्कर्म परिवार द्वारा आयोजित पवित्र श्रावण मास कृष्ण जन्माष्टमी पावन दिवस श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ महोत्सव अंतर्गत देवभूमि हरिद्वार में श्रीमद् भागवत कथा पूज्य गुरुदेव भागवताचार्य सुरेशचंद्रजी पंड्या के मुखारविंद से दिनांक 5 सितंबर से 11 सितंबर, भारत माता मंदिर के पास, कच्छी आश्रम, हरिद्वार में चल रही भागवत में कथा वाचक ने भक्त प्रह्लाद का प्रसंग सुनाया। बताया कि भक्त पर जब भी अत्याचार होते हैं तो भगवान स्वयं उसकी रक्षा करते हैं।
कथा व्यास जी कहा कि भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की कथा तो हम सभी जानते हैं। हिरण्यकश्यप जैसे अधर्मी को मारने और भक्त प्रह्लाद की रक्षा के लिए विष्णु भगवान नृसिंह अवतार लेकर स्तंभ में से प्रकट हुए। उन्होंने हिरण्यकश्यप को उठाया और महल की चौखट पर लाकर अपनी गोद में लिटा लिया और अपने नाखूनों से उसका सीना चीर दिया। लेकिन हिरण्यकश्यप का अंत करने के बावजूद उनका क्रोध शांत नहीं हुआ। जिससे भू लोक, स्वर्ग लोक और पाताल लोक कांपने लगा। प्रभु के क्रोध को शांत करने की शक्ति सिर्फ महाकाल भगवान शिव के पास ही हो सकती थी। सारे देव शिवजी की स्तुति करने लगे। तब जाकर भक्तों की पुकार पर शिव उन्हें शांत करने गए। लेकिन नृसिंह भगवान का क्रोध शांत करने मे वो भी असफल हुए। फिर त्रिकालदर्शी शिवजी ने मानव, चील और सिंह के शरीर वाले भगवान सर्वेश्वर का अवतार लिया। नृसिंह और सर्वेश्वर अवतारों में पूरे 18 दिनों तक युद्ध चला। अंततः भगवान नरसिंह सर्वेश्वर अवतार के आगे कमजोर पड़ने लगे और हार स्वीकार कर अपने क्रोध को शांत किया। सभी देवों ने विष्णु स्तुति की तब भगवान नरसिंह श्रीहरि में लीन हो गए। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
कथा के मुख्य यजमान: श्री राधा कृष्ण मंडल, मुम्बई दहिसर वैशाली नगर है।
इस कथा का लाइव प्रसारण A-one imagine TV चैनल द्वारा भारत सहित 126 देशों में किया जा रहा है। साथ ही सोशल मीडिया यूट्यूब, फेसबुक के द्वारा भी प्रसारण हो रहा है।

