हरिद्वार: श्रीमद भागवत कथा में भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का प्रसंग सुनाया
हरिद्वार : दिनांक 11 सितंबर श्री मद् सेवा सत्कर्म परिवार द्वारा आयोजित पवित्र श्रावण मास कृष्ण जन्माष्टमी पावन दिवस श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञानयज्ञ महोत्सव अंतर्गत देवभूमि हरिद्वार में श्रीमद् भागवत कथा पूज्य गुरुदेव भागवताचार्य सुरेशचंद्रजी पंड्या के मुखारविंद से दिनांक 5 सितंबर से 11 सितंबर, भारत माता मंदिर के पास, कच्छी आश्रम, हरिद्वार में चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान महायज्ञ के सातवें दिन कृष्ण के अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया गया।
हरिद्वार कच्छी आश्रम में चल रही सात दिवसीय श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के आखरी दिन की कथा व्यास पूज्य गुरुदेव भागवताचार्य सुरेशचंद्रजी पंड्या ने विभिन्न प्रसंगों पर प्रवचन दिए। उन्होंने कहा कि सातवें दिन कृष्ण के अलग-अलग लीलाओं का वर्णन किया गया। मां देवकी के कहने पर छह पुत्रों को वापस लाकर मा देवकी को वापस देना सुभद्रा हरण का आख्यान कहना एवं सुदामा चरित्र का वर्णन करते हुए कथा व्यास जी ने बताया कि मित्रता कैसे निभाई जाए यह भगवान श्री कृष्ण सुदामा जी से समझ सकते हैं। उन्होंने कहा कि सुदामा अपनी पत्नी के आग्रह पर अपने मित्र (सखा) से सुदामा मिलने के लिए द्वारिका पहुंचे। उन्होंने कहा कि सुदामा द्वारिकाधीश के महल का पता पूछा और महल की ओर बढ़ने लगे द्वार पर द्वारपालों ने सुदामा को भिक्षा मांगने वाला समझकर रोक दिया। तब उन्होंने कहा कि वह कृष्ण के मित्र हैं। इस पर द्वारपाल महल में गए और प्रभु से कहा कि कोई उनसे मिलने आया है।अपना नाम सुदामा बता रहा है। जैसे ही द्वारपाल के मुंह से उन्होंने सुदामा का नाम सुना प्रभु सुदामा सुदामा कहते हुए तेजी से द्वार की तरफ भागे सामने सुदामा सखा को देखकर उन्होंने उसे अपने सीने से लगा लिया। सुदामा ने भी कन्हैया कन्हैया कहकर उन्हें गले लगाया और सुदामा को अपने महल में ले गए ओर उनका अभिनंदन किया। इस ²श्य को देखकर श्रोता भाव विभोर हो गए। उन्होंने सुदामा और कृष्ण की झांकी पर फूलों की वर्षा की।
कथा के मुख्य यजमान: श्री राधा कृष्ण मंडल, मुम्बई दहिसर वैशाली नगर है।
इस कथा का लाइव प्रसारण A-one imagine TV चैनल द्वारा भारत सहित 126 देशों में किया जा रहा है। साथ ही सोशल मीडिया यूट्यूब, फेसबुक के द्वारा भी प्रसारण हो रहा है।

